नेताओं के पैर छूने की परंपरा बंद करना चाहते हैं DMK अध्यक्ष एम के स्टालिन

किसी पार्टी अध्यक्ष ने कार्यकर्ताओं के आत्मसम्मान को समझा और पैर छूने की जगह नमस्कार से अभिवादन की परंपरा शुरू करवाई हैं .

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राजनीति में नेताओं के पैर छूने की परंपरा इतनी तेजी से बढ़ रही हैं कि कार्यकताओं के साथ बड़े नेता भी अपने कम उम्र के लोगो के पैर छूने में संकोच नहीं कर रहे हैं ,बुजुर्गो द्वारा पैर छूते विडियो वायरल होने के कारण कई नेताओं को सोशल मीडिया पर आड़े हाथों भी लिया जाता हैं. भाजपा,कांग्रेस समेत सभी दलों में सार्वजनिक मंच पर लोग बड़े नेताओं का ध्यान आकर्षित करने के लिए उनके पैर छूते हैं.

द्रमुक के अध्यक्ष एम के स्टालिन ने कार्यकर्ताओं द्वारा अध्यक्ष के पैर छूने की परंपरा को “आत्म सम्मान के सिद्धांत ” के खिलाफ बताया हैं . द्रमुक ने एक प्रेस नोट जारी कर अपने कार्यकर्ताओं से कहा है कि वह एम के स्टालिन के पैर न छुएं, पैर छूने की जगह प्यार से ‘वणक्कम’ कहकर पार्टी प्रमुख का अभिवादन किया जाना चाहिए. स्टालिन के पैर छूने का विरोध करते हुए पार्टी ने कहा, ‘अब हमें ध्यान आकर्षित करने के लिए पैर छूने की दासत्व भावना को त्यागना चाहिए और एक अच्छी राजनीतिक संस्कृति की मजबूती के लिए सहयोग करना चाहिए.

प्रेस नोट में यह भी कहा गया कि स्टालिन और अन्य नेताओं को माला पहनाने या शाल ओढ़ाने की जगह किताबें भेंट की जा सकती हैं जो छात्रों और जनता के उपयोग के लिए पुस्तकालयों को दी जा सकती हैं. डीएमके पार्टी मुख्यालय ने प्रेस  विज्ञप्ति में कहा, ‘हम कार्यकर्ताओं से आग्रह करते हैं कि वे पैर छूकर पार्टी अध्यक्ष एम के स्टालिन के लिए असहज स्थिति उत्पन्न न करें. हमें दायित्व, गरिमा और अनुशासन के सिद्धांत की रक्षा करनी चाहिए.’ इसमें कहा गया कि प्यार के साथ केवल ‘वणक्कम’ कहकर स्टालिन का अभिवादन किया जा सकता है.

बहरहाल खुशी की बात हैं कि किसी पार्टी अध्यक्ष ने कार्यकर्ताओं के आत्मसम्मान को समझा और पैर छूने की जगह नमस्कार से अभिवादन की परंपरा शुरू करवाई हैं .

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