धारा 498a दहेज प्रताड़ना : सुप्रीम कोर्ट ने कहा पुलिस तय करेगी गिरफ्तारी

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नई दिल्ली:  सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है. सुप्रीम कोर्ट IPC की धारा 498a, दहेज प्रताड़ना के मामलों में पति की गिरफ्तारी तय करने का अधिकार पुलिस को वापस दे दिया है.अब पुलिस ही फैसला करेगी की पति की तुरंत गिरफ्तारी होगी या नहीं .

यानी कि अब पुलिस चाहे तो दहेज उत्पीड़न के मामले में पति की तुरंत गिरफ्तारी हो पाएगी.हालांकि, पति के पास अग्रिम ज़मानत लेने का ऑप्शन बरकरार रहेगा.

2017 में सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की बेंच ने आदेश दिया था कि दहेज उत्पीड़न के मामले में पति या उसके परिवार की सीधी गिरफ्तारी नहीं हो सकती है.

पिछले साल जुलाई में सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि आईपीसी की धारा-498a  यानी दहेज प्रताड़ना मामले में गिरफ्तारी सीधे नहीं होगी. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि दहेज प्रताड़ना मामले को देखने के लिए हर जिले में एक परिवार कल्याण समिति बनाई जाए और समिति की रिपोर्ट आने के बाद ही गिरफ्तारी होनी चाहिए .

सुप्रीम कोर्ट में तीन जजों की बेंच ने दो जजों की बेंच के फैसले में संशोधन किया और कहा कि इस तरह कोर्ट कानून की खामियों को नहीं भर सकता. ये कार्यपालिका द्वारा कानून लाकर ही करना संभव है.

अब परिवार कल्याण कमेटी की आवश्यकता नहीं होगी

दहेज उत्पीड़न कानून (498 A) पर अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अब शिकायत की सुनवाई के लिए किसी परिवार कल्याण कमेटी की आवश्यकता नहीं होगी.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि समाज में महिला को बराबर हक मिलना चाहिए इसमें कोई दो राय नहीं है, साथ ही हम ऐसा भी निर्णय नहीं दे सकते हैं कि पुरुष पर किसी तरह का गलत असर पड़े.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच बैलेंस बनाना जरूरी है. सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया कि अगर दोनों पक्षों में समझौता होता है तो कानून के मुताबिक वो हाईकोर्ट जा सकते हैं.

अगर पति पक्ष कोर्ट में अग्रिम जमानत अर्जी दाखिल करता है तो केस की उसी दिन सुनवाई की जा सकती है.

गिरफ्तारी को लेकर सुप्रीम कोर्ट के सिद्धांत में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि CRPF की धारा 41 में गैर जमानती अपराध में गिरफ्तारी को लेकर संतुलन कायम किया गया है. मनमानी गिरफ़्तीरी को रोकने के लिए CRPC 41 में साफ प्रावधान है कि पुलिस अगर किसी को गिरफ्तार करती है तो पर्याप्त कारण बताएगी और न गिरफ्तार करने का भी कारण बताएगी. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में परिवार कल्याण कमिटी के फैसले को खारिज कर दिया है.

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